गुरुवार, 13 जून 2013

माँ 





                  
दाता भी माता से बढ कर, अहसान नहीं कर सकता है |
जो मां करती वह कोई भी, इन्सान नहीं कर सकता है |
ना टूटे निंदिया बच्चे की, मां रात-रात भर जगती है,-
गीले में सोकर नींदों को, कुरबान  नहीं  कर सकता है |
बच्चे पर संकट दिखे जरा, मां खेल जान पर जाती है,-
कोई इस खातिर खतरे में, निजप्राण नहीं कर सकता है |
ठोकर लग जाए बच्चे को, माता का दिल हिल जाता है,-
बच्चे की पीड़ा का कोई, यह ध्यान नहीं कर सकता है |
सौ बार पुकारे "मां" बच्चा,  मां दौड़-दौड़ आ जाती  है,-
माता के जैसा ऐसा भी, संज्ञान  नहीं कर सकता  है |
आंखों से बच्चा हो ओझल,विचलित हो करने लगे दुआ,-
इतनी ममता का कोई भी,प्रतिदान नहीं कर सकता है |
मां को इन सब के बदले में, संघात करे संतान अगर,-
बददुआ नहीं दे 'राज' कभी, इन्सान नहीं कर सकता है |


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