शुक्रवार, 14 जून 2013


  रखता हूँ मै

मंजिल-ए-मकसूद तक, रस्ते खुले रखता हूँ मै |
जीत के अपने जिगर में, जलजले रखता हूँ मै |
जोड़ना सम्बन्ध सबसे, ये शगल मेरा नहीं,
जोड लेता हूँ तो फिर, रिश्ते भले रखता हूँ मै |
आँख से आँखे मिला, जानकर दिल का लिखा,
हो अगर इंसानियत तो,सिलसिले रखता हूँ मै |
प्यार का मारा मुझे, मिलता है कोई प्यार से,
दोस्ती कर के हमेशा , दिल मिले रखता हूँ में |
है ये कुदरत की अमां या माँ का आशीर्वाद है,
हर भलाई के जहन में, वलवले  रखता हूँ मै |
बेवजह रिश्ते किसी से, जोड़ता है कब कोई ,
गमजदा से 'राज' अपने , मरहले रखता हूँ मै |

1 टिप्पणी:

  1. मित्रों..!
    आजकल उत्तराखण्ड में बारिश और बाढ़ का कहर है। जिससे मैं भी अछूता नहीं हूँ। विद्युत आपूर्ति भी ठप्प है और इंटरनेट भी बाधित है। आज बड़ी मुश्किल से नेट चला है।
    --
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बुधवार (19-06-2013) को तड़प जिंदगी की ---बुधवारीय चर्चा 1280 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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