सोमवार, 24 जून 2013

हिमालय


  हिमालय 

भारत मां के राज मुकुट सा,
सर पर जड़ा हिमालय |
जय जवान सा रक्षक बन कर,
तत्पर खड़ा हिमालय |

अविरल देकर नीर नदी को,
करता भरित हिमालय |
खेत उगलते सोना जिससे,
करता हरित  हिमालय |
  
झेल रहा बर्फीली आंधी, 
इधर  न आने   देता-,
कष्ट सभी अपने ऊपर ही, 
बिना कहे  ले  लेता |

सागर से उठते बादल को, 
 पार न  होने  देता |
भारत में बरसा कर बादल,. 
जलधि न खोने देता |

देता रहता  खनिज हमेशा, 
भारत धनिक बनाने,
सघन वनों को परिपूरित कर,
जीवन सुखद बनाने |

किन्तु नहीं हम जीने देते, 
इसको  जीवन   इसका |
धीरे-धीरे अंग भंग  कर,.  
कुतर रहे तन इसका |

कसम एक सब मिलकर खाएं,
हरा-भ्ररा हम इसे बनाएं,
लेता नहीं कभी बस देता, 
स्वर्णिम इसका  रूप बनाएं |

  धनवर्षा,हनुमानमन्दिर्,खटीमा-२६२३०८(उ०ख०)
          मो- 0941071877

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