शनिवार, 22 जून 2013

कुत्तों को बिस्किट






कुत्तों  को बिस्किट 


खिलवाते कुत्तों को बिस्किट, लाखों भूखे सो जाते हैं |
जनता के पैसे से नेता,  जीवन भर मौज उड़ाते  हैं |
भारत में भूखे-नंगों को, दे नहीं पा रहे  पानी तक ,
पाकिस्तानी जल प्लावन में, लाखों डालर दे आते हैं |
घर अपना सिंगल कमरे का,सूनी आँखों का सपना है,
मंत्री जी पच्चिस  लाख मगर,पर्दों पर खर्च कराते हैं |
रोटी के टुकड़े को बचपन,जब तरस रहा है भारत में,
ये मुफ्तखोर `निर्धन नेता`,लाखों वेतन बढ़वाते  हैं |
बिक रही अस्मतें कौड़ी में, ये खुद क्रेता-विक्रेता  हैं ,
कमरे से बाहर आते ही,   ये 'गंगाजल' हो जाते हैं |
रखते हम चौकीदारी को, ये घर में लेते सेंध  लगा ,
अरबों डकार लेते रिश्वत, स्विसबैंक जमा करआते हैं |
होते हैं जब हम खड़े कभी, अब शठे-शाठ्यम कर देंगे,  
ये पीछे सी.बी.आई.लगा, 'भगवा' कहने लग जाते हैं | 
करो सुरक्षा `राज` स्वयं, मरती जनता तो मरने दो,
नक्सल,आतंकी छोड़ खुले, खुद बुलेट प्रूफ में जाते हैं |

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