मंगलवार, 11 जून 2013

आडवाणी पुराण

 आडवाणी-पुराण  

अडवाणी ने भीष्म बन,चला दिया ब्रह्मास्त्र |
सीखों का लम्बा स्वयं,खोलदिया हर शास्त्र |
खोल दिया हर शास्त्र, नफ़ीरी अलग  बजाते,
सबको लेकर चलो साथ, यह मन्त्र बताते |
कहे'राज' कवि,अधिक उम्र में सोच अजानी,
बाबर - ढांचा विध्वंस,  भुला बैठे अडवाणी ?
-०-
भजन - कीर्तन उम्र में, ले  सत्ता का ख्वाब |
मिटटी सबकी जानकर, करते फिरें खराब |
करते  फिरें  खराब,  प्रैस  में  सब  ले जाते,
घातों के हथियार,नवल  नित उन्हें थमाते |
कहे'राज'कवि, मातम धुन पर भंगड़ानर्तन,
घर  पर  पड़े  अकेले,  रोते  करते  क्रन्दन |
-०-
उम्र और  इतिहास का,  कुछ तो रखो ख्याल |
दादा  बन सबकुछ किया,इसका नहीं मलाल |
इसका  नहीं  मलाल,  उठा भगवा रंग परचम ,
लौह-पुरुष बन इतरा  रथ पर , चलते हरदम |
कहे 'राज' कवि, चौथे-पन क्या जिन्ना होना,
ले  डालो  सन्यास, बंद करो  यह  रोना धोना |
-०-

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