सोमवार, 5 नवंबर 2012

युगल पुष्पांजलि


युगल पुष्पांजलि
        -डा.राज सक्सेना
लग     रही  सजी  पूरी  धरती,
दिपदिप दमकित नभ सारा है |
दुल्हन   चांदी    सी शुभ्र धवल,
दूल्हा   सोने   सा     प्यारा है |

आदम - हव्वा   की यह  जोड़ी,
सीधे   बहिश्त    से   आई है |
आभा -मण्डल  से  दमक रही,
पति - पत्नी  की     तरूणाई है |

नव - जीवन में रख पग दोनों,
अब संग चलेंगे हिलमिल कर |
सुख दुख को   साथ सहेंगे ये,
जीवन के पथ पर हंसहंस कर |

एक नई    इकाई  बनी   आज,
सब करते    हैं सत्कार सबल |
हम भी इस     सुन्दर जोड़े को,
देते      अपना  आशीष  नवल |

है यही  प्रार्थना  हम  सब की,
इनको जनजन का प्यार मिले |
झोली  खुशियों  से   भरी   रहे,
उपहारों     का   अंबार    मिले |

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