शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2012


  आ. आदेश  जी के सम्मान में सादर
              -डा.राज सक्सेना
हे हिन्दी के विद्वान प्रखर,
पढ कालजयी कुछ रचनाएं |
मन उद्वेलित हो जाता है,
श्रद्धा के भाव उमड़ आएं |
एक ब्रह्मऋषि सम चिन्ता मे,
हिन्दी की आप समाए हैं |
कितने रत्न, अमूल्य आप,
हिन्दी को देते आए हैं |
नितनित दधीचि सा अस्थिदान,
कर रहे आप हिन्दीऋषिवर |
सम्पूरित हिन्दी कोष किया,
अनमोल रत्न हमको दे कर |
है यही प्रार्थना ईश्वर से,
शतशत वर्षों तक जिएं आप |
इस जनकसुता सम हिन्दी का,
वन वासित जीवन हरें आप |
     धनवर्षा,हनुमान मन्दिर,
     खटीमा-262308 (उ.ख.)
Mob. 09410718777
Mail.  raajsaksena@gmail.com

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