शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2012


 सरस्वती-वन्दना
                       -डा.राज सक्सेना
शारदे मां कर  कृपा, मुझको नवल वरदान दे |
निज चरण में बैठने का, अल्पतम स्थान दे |
      साहित्यसागर से अधिकतम,
       अनवरत     आपूर्ति    दे |
      हो जनन साहित्य   नव,
      यह श्रेष्ठतम सम्पूर्ति   दे  |
गीतगंगा को मेरी,नित-नित नये आयाम दे |
शारदे मां कर  कृपा, मुझको नवल वरदान दे |    
      हो सृजन सबसे  अनूठा,
      प्रेम   की   रस-धार    दे |
      शब्द हों आपूर्त रस  में,
      अक्षरों     में   सार   दे  |
मधु सरीखा कंठ दे, रस-पूर्ण मंगलगान  दे |
शारदे मां कर  कृपा, मुझको नवल वरदान दे |    
      त्याग-मय जीवन  मिले,
      निर्लिप्त मन   सद-भार दे |
      श्रेष्टतम - रस - काव्यमय,
      स्वर्णिम सरल - संसार दे |
गंध सा फैले जगत में,वह मुझे यश-मान दे |
निज चरण में बैठने का,अल्प सा  स्थान दे |
      धनवर्षा,हनुमान मन्दिर,खटीमा-262308(U.K.)
                                      मो. 9410718777

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