मंगलवार, 31 जुलाई 2012

श्रद्धान्जलि-प्रेमचन्द्र


          श्रद्धान्जलि-प्रेमचन्द्र
           (३१ जुलाई,२०१२)
हे कथा शिल्प के श्रेष्ट शिखर,
तुमने इतिहास बना  डाला |
दी नई दिशा, हिन्दी युग को,
नायक निर्धन को कर डाला |

दीं नई विधाएं,  भाषा को,
भर-पूर भरा, समृद्ध किया |
घर की साधारण घटना को,
एक श्रेष्ट कथा में बदल दिया |

जो कथा लिखी हो गई शिला,
हर उपन्यास अभिलेख बना |
हर बाल कथा से बालक को,
एक श्रेष्ट नवल परिलेख मिला |

हर अक्षर बना वेदना सा,
हर वाक्य चुभा दिल में जाकर |
एक शब्दचित्र का सृजन किया,
रख दिया पाठकों तक लाकर |

जो लिखा बना वह कालजयी,
हर कथा अमर हो गई वृंद |
हे युग निर्माता हिन्दी के,
शत-शत प्रणाम है प्रेमचंद |
          डा.राज सक्सेना