शनिवार, 14 अप्रैल 2012



          दुबारा जागि गा हमर भारत 
                            - अंजू भट्ट (04-02-1968)
भारत दुनि    में दुबारा     जाग गा यई शंखनाद करै हिन्दी |
दुनियांक सौ करोड़ लोगों कै मिल्यूणक बोलि वण गे हिन्दी |
संसारक भाषाओं पदों कि   ताकतवर       समाधान छ हिन्दी,
संसारक गुरू छी,ताकतवर बणल,विश्वभाषा वण जलि हिन्दी(1)|

भारतक संस्कृति मैंसोंक धर्म कि परिभाषा वण ग्ये हिन्दी |
मन,वचन,कर्मक  कि लगातार  सेवा  का     फल छ हिन्दी |
भारतक संस्कृति दुशमणों ल कभैं लै भलि नि माणि हिन्दी |
अ दिन दूर न ति जब भारतकि राष्ट्र्भाषा वणि जाल हिन्दी (2)

हिन्दी    जानकारों      तपस्याक    ख्वरैकि  बिन्दी छ हिन्दी |
भाषाक   उन्नति  और  स्वाभिमानक    लड़ाई फल छ हिन्दी |
भारताकरितिरिवाज कि इज्जतलिजि घरघर चिट्ठी भेजैं हिन्दी |
भल   आदमीयों    कि भलि बातों कि गीता वण ग्यै हिन्दी (3)

दयानद हिन्दी कैं'आर्य भाषा'कौ जो ज्यानवालि वण ग्ये हिन्दी |
आपणराज म्यर जन्म    वटि हक छ कै वेर चमक गे हिन्दी |
भाषा बिना देश लाट है जाछ,तबै बापूक भरौसैकि वणी हिन्दी |
जय जवान,जय किसानैकि नाराल सबों में फैल ग्ये हिन्दी(4)|

देवनागरी लिपिक     वैज्ञानिकता   ज्ञानल पक्की है ग्ये हिन्दी |
क्रियापद       और       कारकों लें       सदा भलि है गे हिन्दी |
सब        व्याकरणों      लै     तीर्थ     जसि      है ग्ये हिन्दी |
मंत्रो,वर्णों सबों मिबेरि    गंगापाणि जसि साफ है गे हिन्दी |(5)

विदेश   रणियांक   लिजि    पेट    पावणक    साधन छ हिन्दी |
मातृभूमि वै दूर हैवेर भौते दुःख झेल बेर लै नि छोड़ हिन्दी |
संसार     में       भौतै      प्रेमकि     पछाण    वण गे हिन्दी |
संसार में    फैलि   बेर   सबों कि    भाषा   वण गे हिन्दी |(6)

सब जाग ज्ञान   फैलावो    अमृत जस वाणिल रि जो हिन्दी |
संसार मा शान्ति ल्यो और   गुस्स झगड़ों कै दूर करो हिन्दी |
सारै     संसार    हमर परिवार    छः यई संदेश देते रौ हिन्दी |
माफि      दीणि    वणो,सब    भाषाओं में एघिन र वो हिन्दी (7)

सबै    राग    द्वेष    मिटै    बेर   सबों   में प्रेम कराओ हिन्दी |
हमर    देशकि    पन्यार हो हमरि देशकि भाषा वणि रो हिन्दी |
आदमियों, देशक विकास हुनै र वो जातपाताल दूर हो हिन्दी |
संसार में सूरजकि किरणों जसि चमक बेर फैलते र वो हिन्दी(8)|
                           शिक्षिका,श्राफ पब्लिक स्कूल,
                         लोहिया हैड रोड खटीमा-262308(उ०ख्०)

            दुबार जागौ छू हमार भारत 
                             - के.सी.जोशी  (02-05-1948)
संसार म दुबार जागौ भारत हमार,यो शंखे क नाद करे हिन्दी |
आज संसार म सवा सौ करोड लोगन की पहचान बनगे हिन्दी |
संसार म आज भाषाक मजबूती,निर्विकल्प समाधान छू हिन्दी |
संसारकगुरू छी संसारकशक्ति बनोला,संसारक भाषा बनगे हिन्दी (१)

भारतकिसंस्कृति,मानवताकधर्म की रोजै,परिभाषा रई छू हिन्दी |
मन-वचन कर्म से मातृभाषाक सत्सेवाक परिणाम छू हिन्दी |
भारतीय संस्कृतिक दुश्मनों कें कभै नी भाती हमार  हिन्दी |
उ दिन दूर नै छू जब भारताक भाषा बनल गौरवमयी हिन्दी (२)

हिन्दीक ठुलठुल लोगन तपस्याक,माथे की भल बिन्दी छू हिन्दी |
भाषाकप्रगति और अपुमें गुमान हेतु,संघर्षक अभिनन्दन छू हिन्दी |
भारतीय संस्कृति की इज्जत कि पाती,कूढी कूढी भेज रयू छू हिन्दी |
धर्मपरायण मानवता के भल कामों की,एकमात्र प्रज्ञ गीता छू हिन्दी (३)

दयानन्दल हिन्दी को कौ,  आर्यभाषा प्राणों हेले प्यार हेगे हिन्दी |
स्वराज मेरो जन्म सिद्ध अधिकार छू,ऐल क्रान्तिमय हे गे हिन्दी | 
राष्ट्रभाषाक बिण देश गूंग छू,      बापू क विश्वास  बण गे हिन्दी |
जय जवान, जय किसानक उदघोषैल,लोगन में फैल गे हिन्दी (४)

देवनागरी   लिपिक   व   ज्ञानल,   परिपुष्ट व अमर हे गे हिन्दी |
क्रियापदों   व   कारकों   की उत्कंठा में सदा फलफूल गे हिन्दी |
मात्रा, अव्यय, प्रत्यय  के  तीर्थों में,  सुगढ व पवित्र हेगे हिन्दी |
मंत्रपूत,आचरणोंक वर्णक व स्वच्छअर्थल गंगाजल बनगे हिन्दी(5)

प्रवासीभारतीयोंक,हिन्दी प्रेमक,जिजिविषा व प्राण हे गे हिन्दी |
मातृभूमि बैटि बिछुड़ी घोर यातनाएं झेलीं,फिर ले नी छोड़ि हिन्दी |
संसारक  मातृभाषा  अनुरागकि, बेजोड़  प्रतीक बन गे हिन्दी |
प्रतीक बन सबै जाग फैल गे, तभै संसारक भाषा बन गे हिन्दी (६)

ज्ञानक प्रसार सब जाग करें,अमृतवाणीक कथनलि भरि र हिन्दी |
सुख शान्ति की संवाहिका हो,काम-क्रोध कटुता  से दूर र हिन्दी |
विश्वबन्धुत्व,वसुधैव कुटुम्बकम यो प्रज्ञासंदेश सदा देते रहे हिन्दी |
क्षमा-शील बनके ही सब  भाषाओं में सिरमौर सदा  रहे हिन्दी (७)

कटुताक हर तिमिर मिटाबेर लोगन में प्रेम भाव भरती रये हिन्दी |
भारतकि राष्ट्रीय एकता कि पहचान छू, हमार राष्ट्र्भाषा रये हिन्दी |
मानवता व राष्ट्र हो प्रगतिशील, पर जातिवर्गभेद म दूर रये हिन्दी | 
संसार में सूर्यरश्मियों जसि हो आलोकित,आभाषित बनि रये हिन्दी (८)

                                   वार्ड नं० ९,खटीमा (उ०ख०)
                                    मो०- ०९४११७६०३६७

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें