सोमवार, 5 दिसंबर 2011


mere chand ashaar

दूर से देखें, तो लगता है समन्दर में सुकूं,
पास जाकर देखिए,वो किस कदर बेचैन है |
          -०-
कौन कहता है समन्दर में,सुकूं है, चैन है,
देखिए नजदीक जाकर,हद तलक बेचैन है |
          -०-
 कह दिया किसने समन्दर,ज़र्फ से खामोश है ,
देखिये साहिल से वो,मदमस्त है, मदहोश है |
          -o-                                                          
हों इरादे जब अटल तब राह को कया देखना,
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे,रास्ते बन जाएंगे |      $
          -०-
पर्वतों से हौंसले  लेकर चलेंगे हम अगर,
रास्ता देगा समन्दर,आसमां बिछ जाएगा |
          -०-
किस तरह रक्खी गई है बात किस के सामने,
है मुफस्सिर तो जरुरी, है असर हर बात का |
          -0-
दोबाला शान हो जाती,असर कुछ बढ गया होता ,
कहा जो तैश में तुमने,अगर हंस कर कहा होता |
                                        -राज सक्सेना ,खटीमा-262308

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