बुधवार, 14 सितंबर 2011

राष्ट्रभाषा


       राष्ट्रभाषा
            -डा.राजसक्सेना
मातृभाषा पर जिसे,अपनी न स्वाभिमान है |
राष्ट्रभाषा के प्रति, रखता नहीं अधिमान  है |
पूर्ण पशुवत है जिसे,ना शीर्ष पर हो राष्ट्रप्रेम,
सम्पदामय हो,अकिंचन का सही प्रतिमान है |
        -०-
उठो उठकर तलाशें  हम, नई  सम्भावनाओं को |
करें हिन्दी की अब सेवा,करें नव- साधनाओं को,
सरल जीवन,सघन मेहनत,यही चाहा है हिन्दी ने,
हटाकर अपने जीवन से,मिटा दें धारणाओं  को |
        -०-
हमारे दिल में हिन्दी का,अभी भी ख्वाब बाकी है |
इसी से दिल की धड़कन में,दिलेबेताब  बाकी  है |
शहर से उठ गई हिन्दी,हमारे गांव में    लेकिन,
धड़कती है दिलों मे वो,सरो-शादाब    बाकी  है |
        -०-
मैं हिन्दी हूं,मै हिन्दी था,रहूंगा मैं सदा  हिन्दी |
है हिन्दी ही कथा मेरी,रही हमदम सदा  हिन्दी |
नहीं हूं वर्णसंकर मैं,जो बोलूंगा  अलग  भाषा,
मैं भारत मां का बेटा हूं,मैं बोलूंगा सदा हिन्दी  |
        -०-
करेगी देश को जगमग,मुझे विश्वास विश्वास हिन्दी का |
है उत्सव के लिये निशचित,सितम्बर मास हिन्दी का |
हर एक चौद्ह सितम्बर को,मनाते हैं हम 'हिन्दी डे'-
इसी दिन हम किया करते हैं,तर्पण खास हिन्दी  का |
        -०-
मनाते इस तरह से हम, अजब त्योहार हिन्दी   का |
इकट्ठे हो लिये, मातम मना, हर बार  हिन्दी  का |
बना कर एक खबर भेजी जहां छपता  है   रोजाना-,
फिर अगले दिन पढ़ा करते हैं हम,अखबार हिन्दी का |
        -०-
 

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