सोमवार, 12 सितंबर 2011


      ब्रजेन्द्र भगत तुमको प्रणाम
                     -डा.राज सक्सेना
मारीशस  जैसा  पुण्य-धाम,
उसमें जन्मा एक पुण्यनाम |
हे राष्ट्रकवि ब्रजेन्द्र  भगत-,
तुमको हिन्दी के शतप्रणाम |

अविराम लिखा इतना तुमने,
हिन्दी में महिमा भरने को |
पचहत्तर कविता लिख डालीं,
सुन्दरतम हिन्दी करने को |

हिन्दी,हिन्दू के  संरक्षक -,
तुमने  इतिहास बनाया है |
हिन्दी - गंगा की धारा को,
तुमने सम्भाष  बनाया है |

सेवा अविरल कर हिन्दी की,
तुम बने,सुशोभित राष्ट्रकवि |
अन्तरतम वीणा झंकृत कर,
दे दिया श्रेष्ट ,बन  महाकवि |

कल्पनालोक में विचरण्-कर ,
तुमने रच डाला सब यथार्थ |
हे राजहन्स कविता युग के ,
रथियों मे शोभित श्रेष्ठ पार्थ |

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