गुरुवार, 1 सितंबर 2011

ईद-मुबारक


       ईद-मुबारक
             -डा.राज सक्सेना
ईद  पर  रस्म  है,मिलते  हैं  गले  सब बढ़कर |
चलो मिलकर गले,इस ईद पर हम दोस्त हो जाएं |
          -०-
वस्ल पर रोक लगा दी है,चलो मान गये |
ईद पर दीद न हो, रस्म भी तोड़ी तुमने |
          -०-
ईद पर उनसे कहा,आओ गले मिल जाओ |
दबा के होंठ ये बोले,मिंयां  मुंह धो आओ |
          -०-
जवानी में क़दम रखते ही,जगमग कर दिया आलम |
जवां भरपूर होकर तुम,ग़ज़ब ढ़ाओगे  क्या  जानम |
          -०-
नहीं है उम्र कम लेकिन,बहुत भोले हैं दिल के वो |
किये ज़िद कल से बैठे हैं,दिखाओ दर्दे दिल हमको |
          -०-

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