मंगलवार, 27 सितंबर 2011

apna banalo

   प्रिय मुझे अपना बनालो
               -डा. राजसक्सेना
पाश में लो बांध मुझको,  एक  नया  संसार ढालो |
ना रहे अस्तित्व मेरा, अंक  में मुझ   को छुपालो |
   प्रिय मुझे अपना बनालो |

कल्पना से सिर्फ जब मन,है प्रफुल्लित तन मुदित है |
जब मिलन की कामना है, कामना में सब उचित  ह |
ढेर से स्वपनों को जीवन,- दान देकर   जगमगा लो,
   प्रिय मुझे अपना बनालो |

कुछ दिनों की बात है यह,फिर शमन हो जायगा सब  |
मिल रहा यौवन सतत तब,तन नया सुख पायेगा अब |
पल्लवित नवरूप लेकर,  रूप-यौवन को   सम्भालो ,
   प्रिय मुझे अपना बनालो |

देह  हों  दोनों  महालय, और  हम  दोनों   प्रवासी  |
प्यार हो बस प्यार उर में, हो नहीं  पल भर  उदासी  |
तुम मुझे दो प्यार अविरल,प्रतिदान  में अनुराग पालो ,
   प्रिय मुझे अपना बनालो |

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