मंगलवार, 27 सितंबर 2011

aa...tan madmaata

   आगया बसन्त तन मदमाता
                    -डा.राजसक्सेना
बासन्ती चूनर लहराता,मद्धम स्वर में हर  क्षण गाता |
मदभरा मास आ गया पुनः,मकरन्दी मौसम छलकाता |
   आगया बसन्त तन मदमाता |

   हर लता चाहती लट सुलझे,
   प्रिय के कंपित निज कर से |
   घनघोर घटायें छा    जायें,
   हो पास प्रिय बिजली कड़के |
डर कर लिपटे वह प्रियतम से,लेकर अपना मन थर्राता |
मदभरा मास आ गया पुनः,मकरन्दी मौसम छलकाता |
   आगया बसन्त तन मदमाता |

   धरती पर लगे, लगी मेंहदी,
   दर्पण में दिखती छवि प्रिय की |
   मनचातक पियपिय बोल रहा,
   हर दिशा लगे महकी-महकी |
मनकरता तनको दुलराने,इसक्षण प्रियतम आंगन आता |
मदभरा मास आ गया पुनः,मकरन्दी मौसम छलकाता |
   आगया बसन्त तन मदमाता |

   आती  पुरवाई  गंध  लिये,
   स्वर्णिम किरनों को संग लिये |
   तन छूने लिपटे भावविव्हल,
   प्रिय सा अनुपम स्पर्श लिये |
प्रिय सा छूजाना अनजाने,हल्का तन-मन को कर जाता |
मदभरा मास आ गया पुनः,मकरन्दी मौसम छलकाता |
   आगया बसन्त तन मदमाता |

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