गुरुवार, 11 अगस्त 2011

अपना यार करता है


       अपना यार करता है
                -डा.राज सक्सेना

नहीं करता जो  दुश्मन  भी,वो मेरा यार करता है |
झुका कर शोख नज़्ररों को,वो दिल पर वार करता है |
मुझे मालूम है ये सब,मगर ये बात दिल की है,
अजब शै है ये मेरा दिल, उसी से प्यार करता है |
हमेशा की तरह् वादा , न आएगा वो शबभर फिर,
जगा कर रात भर हमको, हमें  बेदार  करता है |
खता हमसे हुई कैसी,लगा बैठे हैं दिल उससे,
जो इज़हारे मुहब्बत से,सदा इन्कार करता है |
मैं जब-जब फूल चुनता हूं,चढ़ाने के लिये उसपर,
चुभोने को वो कांटों की,  फसल तैय्यार करता है |
ये कैसा प्यार है हरदम,मचलता है सताने को,
फसाने को मुहब्बत के, सदा मिस्मार करता है |
अकीदा किस कदर मुझको,मुहब्बत पर मेरे दिल की,
जो इतनी ठोकरें खाकर, यकीं हर बार करता है |
मुझे मालूम है यह भी,करूं क्या"राज"इस दिल का,
जो महरूम्-इ-वफा उससे,वफा दरकार करता है |
   धनवर्षा,हनुमानमन्दिर,खटीमा-२६२३०८(उ०ख०)

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