शनिवार, 20 अगस्त 2011

संस्था-गीत माडर्नयूटोपियन्स


      संस्था-गीत माडर्नयूटोपियन्स
                      -डा.राज सक्सेना

अटल  इरादे  हिम्-पर्वत  के,शिखर -सरीखे ठान कर |
जन-गण के उत्थान लक्ष्य को,निकले मन में मान कर |

अविचल रह कर प्रेमभाव पर,नहीं बैर का नाम सुनेंगे ,
पड़ जाएं मन बीज फूट के, नहीं  सहेंगे-नष्ट  करेंगे  |
एकनिष्ठ हो कर्म समर्पण,  एक राय  सम्मान   कर्,
जन-गण के उत्थान लक्ष्य को,निकले मन में मान कर |

शिवा सरीखा करें नाम हम,भगत सिंह सा काम करेंगे ,
राणा जैसे कष्ट मिलें पर,  कर्तव्यों से  नहीं   हटेंगे |
करें निछावर प्राण देश पर,लक्ष्य हृदय  में  ठान कर |
जन-गण के उत्थान लक्ष्य को,निकले मन में मान कर |

लोककला सर्वोच्च बनाकर , ललितकलाओं को महकाएं,
प्राण फूंक साहित्य विधा में,साहित्यिक सहचर बनजाएं |
हिन्दी संग गढ़वाल-कुमैय्या, भाषा का उत्थान   कर ,
जन-गण के उत्थान लक्ष्य को,निकले मन में मान कर |

  धनवर्षा,हनुमानमन्दिर,खटीमा-२६२३०८ (उ०ख०)
          मो०- ०९४१०७१८७७७

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