मंगलवार, 9 अगस्त 2011

कथा शहीद उधमसिंह्


    कथा शहीद उधमसिंह्  
              -डा.राज सक्सेना
इकत्तीस जुलाई प्रतिवर्ष,
हम को कुछ याद दिलाती है |
एक अमरकथा बलिदानी की,
आ नयनों में बस जाती है |

पंजाब प्रांत का सुनाम ग्राम,
हो गया धन्य कृत्कृत्य हुआ |
नारायणकौर सुमाता ने,
जब शेरसिंह को जन्म दिया |

था दिवस दिसम्बर का छब्विस,
निन्नानबे अट्ठारह सौ सन था |
पिता टहलसिहं उछल पड़े,
जब पुत्र जन्म संदेश सुना |

अल्पायु में माता खोकर,
परवरिश अनाथों में पाई |
जब अमृतपान छका उसने,
तब नाम उधम पाया भाई |

बचपन में जलियां बाग हुआ,
अंग्रेजों से नफरत मानी थी  |
डायर से बद्ला लेने की,
मन में उसने  निज ठानी थी  |

इंग्लैण्ड गये  और घात लगा,
ओ डायर का बध कर डाला |
एक कील ठोक कर शासन में,
साम्राज्य ब्रिटिश को मथ डाला |

चढ़ गये खुशी से फांसी पर,
जय भारत मां की बोली थी |
अपने ही बल से  सिंह्पुरूष,
राह्-ए-आजादी खोली थी |

"काम्बोज रत्न, हे उधमसिंह्",
तुम भारत के जन-नायक हो |
तुम सिंह्-प्रसूता भारत-मां के ,
हो गये अमर,वह शावक हो |
 धनवर्षा,हनुमानमन्दिर, खटीमा

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