शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

itihas bnayen

          इतिहास बनाएं 
                       - राज सक्सेना 
उठो चलो इतिहास बनाएं |
धरती से नभ तक छा जाएँ |

हम बच्चे हैं सब धर्मों के , 
मिल कर रहना कर्म हमारा |
भारत माता इष्ट हमारी,
राष्ट्र धर्म है  धर्म  हमारा  |
इसके हित सबसे टकराएँ,
उठो चलो इतिहास बनाएं               |

एक लक्ष्य है, एक लगन है,
कैसे श्रेष्ठ बनाएं भारत |
चंदा,सूरज सा देशों में ,
जगमग हम चमकाएं भारत |
हम इसको स्तुत्य बनाएं,
उठो चलो इतिहास बनाएं     

था इतिहास कभी ये अपना,
स्वर्णिम था ये देश हमारा |
उसी रूप में चमचम चमके,
रहे यही उद्देश्य  हमारा |
वहीं परिश्रम कर पहुंचाएं,
उठो चलो इतिहास बनाएं     

विज्ञानी बन नभ को छू लें,
पातालों तक मनभर  घूमें |
धरती पर हम स्वर्ग बनादें,
हर ऊंचाई को हम छू लें |
नये-नये प्रतिमान बनाएं,
उठो चलो इतिहास बनाएं     

नई-नई परतों को खोलें,
सिर्फ प्रेम की भाषा बोलें |
दीन-दुखी न रहे जगत में,
ऐसी सुंदर राहें खोलें |
एक सुखी संसार बनाएं,
उठो चलो इतिहास बनाएं       

खूब उगायें अन्न धरा पर,
शांति-अहिंसा रहे धरा पर |
घर-घर में उजियारा आये,
मने दिवाली रोज धरा पर |
भारत माँ को पूज्य बनाएं ,
उठो चलो इतिहास बनाएं       

 - धन वर्षा,हनुमान मन्दिर,
खटीमा-262308 (उ.ख)
 मो- 09410718777

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1 टिप्पणी:

  1. राष्ट्रीय भावनाओं से सींचित आपकी यह रचना सुंदर है । बधाइयाँ ।
    - डॉ. सी. जय शंकर बाबु

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