मंगलवार, 26 जुलाई 2011

मातृभाषा पर जिसे अपनी न स्वाभिमान है |
राष्ट्रभाषा के प्रति,मन में नहीं  अधिमान है |
है अधमपशुवत जिसे ना,शीर्ष पर हो राष्ट्रप्रेम,
सम्पदामय् हो भले, किंचित नहीं श्रीमान है |
                - डॉ. राज सक्सेना


मातृ एंव राष्ट्र-भाषा,राष्ट्र- प्रेम  रख   मूल |
हों निर्णय और कर्म सब स्वाभिमान अनुकूल |
                - डॉ. राज सक्सेना 

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