सोमवार, 25 जुलाई 2011

    उत्तराखण्ड प्रदेश गीत 
            - डॉ.राज सक्सेना

भरत भूमि,भव भूति,प्रखण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

सकल-समन्वित श्रमशुचिताम |

शीर्ष सुशोभित,  श्रंग-शताम |
विरलवनस्पति, विश्रुतवैभव-,
पावन पुण्य-प्रसून   शिवाम |

हरितहिमालय,हिमनद्-खण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

नन्दा- नयना, पंच् -प्रयाग |
भक्तिभरित,भव्-भूति प्रभाग |
अन्नरत्न- आपूरित, आंगन-,
त्तरल-तराई,  तुष्ट - तड़ाग् |

तपोनिष्ठ- त्तप-भूमि  प्रचण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

गिरिजाघर, श्रुत-श्रेष्ठ- विहार |
कलियर,  हेमकुण्ड, हरिद्वार |
परमप्रतिष्ठित ,चतुष्धाम्-मय-,
पावन - द्वैनद् पुलक- प्रसार |

धवल-धरा-ध्वज, धर्मप्रखण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

सर्वधर्म, समुदाय - निवास |
सत्य, शौर्य, शुचिता-श्रेयास |
पावन्-प्रेम, परस्पर- पूरित ,
मूल सहित,श्रमशील- प्रवास |

भ्रातृ-भाव भवभक्ति  अखण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

  

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