बुधवार, 27 जुलाई 2011

hindi hai prodyougik bhasha

 विश्व बना है एक ग्राम सा,
एक बने इसकी भाषा  |
विद्यमान हिंदी में यह गुण,
बने प्रोद्यिकी  की भाषा  |

प्रोद्यिकीग्रहण-संप्रेषण क्षमता ,
सबसे ज्यादा  हिंदी में |
पूर्व और इस दौर रचे नौ-,
लाख शब्द हैं ,हिंदी में |

कंप्यूटर की वैज्ञानिक भाषा,
शून्य, एक की है भाषा |
शून्य दिया भारत ने सबको,
हिंदी प्रौद्योगिक है भाषा |

काम करें हिंदी में हम तो ,
कंप्यूटर हिंदी बोलेगा |
हम हिंदी भाषा में खोलें,
तब यह हिंदी ही खोलेगा |

बिशेषज्ञ कुछ जुटे हुए हैं,
सुगठित कोड बनाने को |
रोक नहीं पायेगा कोई,
हिंदी प्रोद्यौगिक बनजाने को |

धनवर्षा, हनुमान मंदिर,
खटीमा-२६२३०८ (उ.ख.)
मो. 09410718777




मंगलवार, 26 जुलाई 2011

मातृभाषा पर जिसे अपनी न स्वाभिमान है |
राष्ट्रभाषा के प्रति,मन में नहीं  अधिमान है |
है अधमपशुवत जिसे ना,शीर्ष पर हो राष्ट्रप्रेम,
सम्पदामय् हो भले, किंचित नहीं श्रीमान है |
                - डॉ. राज सक्सेना


मातृ एंव राष्ट्र-भाषा,राष्ट्र- प्रेम  रख   मूल |
हों निर्णय और कर्म सब स्वाभिमान अनुकूल |
                - डॉ. राज सक्सेना 

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सोमवार, 25 जुलाई 2011

    उत्तराखण्ड प्रदेश गीत 
            - डॉ.राज सक्सेना

भरत भूमि,भव भूति,प्रखण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

सकल-समन्वित श्रमशुचिताम |

शीर्ष सुशोभित,  श्रंग-शताम |
विरलवनस्पति, विश्रुतवैभव-,
पावन पुण्य-प्रसून   शिवाम |

हरितहिमालय,हिमनद्-खण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

नन्दा- नयना, पंच् -प्रयाग |
भक्तिभरित,भव्-भूति प्रभाग |
अन्नरत्न- आपूरित, आंगन-,
त्तरल-तराई,  तुष्ट - तड़ाग् |

तपोनिष्ठ- त्तप-भूमि  प्रचण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

गिरिजाघर, श्रुत-श्रेष्ठ- विहार |
कलियर,  हेमकुण्ड, हरिद्वार |
परमप्रतिष्ठित ,चतुष्धाम्-मय-,
पावन - द्वैनद् पुलक- प्रसार |

धवल-धरा-ध्वज, धर्मप्रखण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

सर्वधर्म, समुदाय - निवास |
सत्य, शौर्य, शुचिता-श्रेयास |
पावन्-प्रेम, परस्पर- पूरित ,
मूल सहित,श्रमशील- प्रवास |

भ्रातृ-भाव भवभक्ति  अखण्ड |
उन्नत, उज्ज्वल, उत्तराखण्ड |

  

शनिवार, 23 जुलाई 2011


      उज्जवल -उन्नत -उत्त्तराख्ण्ड
                    - राज सक्सेना

पावन , पुण्य-प्रसून ,प्रखण्ड |
उज्जवल -उन्नत -उत्त्तराख्ण्ड |

सफल समन्वित्-श्रमशुचिमान |
गण्-गौरव ,  गंगा-गतिमान |
विरल्-वनस्पति,विश्रुत वैभव्-
वनधन,पशुधन  श्री-श्रुतिमान |

मधुमहिमा -मन्डित सत्-खण्ड |
उज्जवल -उन्नत -उत्त्तराख्ण्ड |

नन्दा,नयना, नवल - प्रयाग |
भावभूमि, भवभरित - प्रभाग |
अन्न -रत्न  आपूरित  आंगन ,
तन्मय -तरल , तराई -भाग |

धवल धरा, ध्वज-धर्म अखण्ड |
उज्जवल -उन्नत -उत्त्तराख्ण्ड

सर्व-सुलभ , श्रुत-श्रेष्ठ  विहार |
हिममय   हेमकुण्ड    हरिद्वार |  
परम प्रतिष्टित - चतुष्धाम से ,
पावन द्वै-नद्  पुलक    प्रसार |

पावस प्रचुर , प्रकल्पित खण्ड |
उज्जवल -उन्नत -उत्त्तराख्ण्ड

सर्व-ध्रर्म , समुदाय - निवास |
शौर्य ,सत्य, शुचिता -सम्वास |
प्रेम - परस्पर , पावन-पूरित ,
मूल सहित ,  श्रमशील प्रवास |

भ्रातृ-भाव ,भव -भूमि अखण्ड |
उज्जवल -उन्नत -उत्त्तराख्ण्ड

  धनवर्षा,हनुमान मन्दिर,
खटीमा-२६२३०८(उत्तराख्ण्ड)
मो० - ०९४१०७१८७७७

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011


       लम्बी है स्याह रातें
                 - डा० राज सक्सेना
लम्बी हैं स्याह रातें, घनघोर सवेरे हैं |
मुद्दत से ये लगता है, हर ओर अन्धेरे हैं |
हो आम-ओ-खास जो भी,जीता है अन्धेरों में,
अन्जाम ये उन सबके, करतब जो उकेरे हैं |
कुछ पाप जमाने से, पाये हैं विरासत मैं,
जो हमने चुने सबही, लगता है लुटेरे हैं |
मछली सा हमें अबतक,समझा है जमाने ने,
जालों को लिये दुबके,हर ओर मछेरे हैं |
कितना भी छटपटायें,सम्भव नहीं निकलना,
मजबूत दिवारों से, हमसब को यूं घेरे हैं |
 हुस्न क़ी मलिका से,कहदो कि नहीं निकले,
हाथों में लिये बीनें, हर ओर सपेरे हैं |
ढॉचा हुआ है जर्जर, अब लाइलाज हैं सब,
दीमक चटी दिवारें, घुन खाए मुंडेरे हैं |
हो "राज्" अब बगावत, बदलेगी चाल वरना,
देने को नस्ले-नौ को, अब सिर्फ अन्धेरे हैं |

  धनवर्षा,हनुमान मन्दिर खटीमा-२६२३०८
   उत्तराखण्ड    मो०- ०९४१०७१८७७७

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

sankshipt parichhy

              संक्षिप्त परिचय 

नाम- डा. राज सक्सेना ( डा.राज किशोर सक्सेना`राज `) जन्म  तिथि- 09 जून ,1945
शिक्षा- एम् .ए.(स.शा.), साहित्य विशारद,विद्या सागर 
विशेष- विनायक  विश्वविद्यालय में डा.राज किशोर सक्सेना `राज` के बाल साहित्य पर दो लघु शोध (एम्.फिल) में सेवा- वर्ष 1965 से 2005 तक उ .प्र. एवं उत्तराखंड शासन के अधीन प्रशासनिक सेवा | 2005 में सहायक नगर आयुक्त नगर निगम देहरादून पद से सेवा निवृत |
साहित्य सेवा- बालसाहित्य में पांच  कविता संग्रह प्रकाशित | कुछ को छोड़ कर लगभग सभी पत्र-पत्रिकाओं में 
बाल कवितायें , गज़लें,गीत, हास्य-व्यंग्य कवितायें तथा आलेख प्रकाशित |
सम्मान - विभिन्न संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय, प्रदेशीय तथा स्थानीय स्तरों पर पच्चीस से अधिक सम्मान | नेपाल में भी तीन बार सम्मानित |
सहभागिता- नेपाल,अंडमान निकोबार ,दिल्ली,उड़ीसा , मध्य प्रदेश, उ .प्र .,राजस्थान,हरियाणा ,महाराष्ट्र आदि 
में अनेकों बार सम्मानित |
सहभागिता- नेपाल, राष्ट्रीय एवं विभिन्न प्रदेश स्तरीय सम्मेलनों में सभागिता |
विशेष सम्मान - सेवा काल में राष्ट्रपति सम्मान |
सम्पर्क- धन वर्षा , हनुमान मंदिर, खटीमा-262308 (उत्तराखंड)
दूर- ध्वनि संपर्क - टेली- 05943252777  मो.- 09410718777 ,  08057320999 .
ई मेल  -  raajsaksena@gmail.com    

pradesh geet-3

        प्रदेश गीत 
              - डा. राज सक्सेना

पावन परम , प्रकल्पित खण्ड |
उन्नत ,उज्जवल , उत्तराखण्ड |

सकल समन्वित, श्रम्-शुचिताम |
शीर्ष-सुशोभित् श्रंग-  शिवाम |
विरल-वनस्पति,विश्रुत्-वैभव ,
भरत्-भूमि, भव-भूति,सुधाम |
पावस पर्यावरण, प्रखण्ड |
उन्नत ,उज्जवल , उत्तराखण्ड |

नन्दा,नयना, पंच-प्रयाग |
भक्ति-भरित,भव्-भूतिप्रभाग |
अन्न-रत्न-आपूरित आंगन,
तरल-तराई,तुष्ट -तड़ाग |
मधु-मन्डित,महिमामयखण्ड |
उन्नत ,उज्जवल , उत्तराखण्ड |

श्रेष्ठ-चर्च,श्रुत-श्रेष्ठि-विहार |
कलियर,हेमकुण्ड,हरिद्वार |
परम-प्रतिष्ठित,चतुष्धाममय,
पावन-द्वैनद-पुलक प्रसार |
हिममन्डित, हिमगिरिहिमखण्ड |
उन्नत ,उज्जवल , उत्तराखण्ड |

सर्व-धर्म,समुदाय-निवास |
सत्य,शौर्य,शुचिता-श्रेयास |
पावन-प्रेम,परस्पर पूरित,
मूल सहित, श्रमशीलप्रवास |
भ्रात्रभाव,भवभक्ति अखण्ड |
उन्नत ,उज्जवल , उत्तराखण्ड |
   
    धनवर्षा,हनुमान मन्दिर,
  खटीमा-२६२३०८(उत्तराखण्ड)

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

itihas bnayen

          इतिहास बनाएं 
                       - राज सक्सेना 
उठो चलो इतिहास बनाएं |
धरती से नभ तक छा जाएँ |

हम बच्चे हैं सब धर्मों के , 
मिल कर रहना कर्म हमारा |
भारत माता इष्ट हमारी,
राष्ट्र धर्म है  धर्म  हमारा  |
इसके हित सबसे टकराएँ,
उठो चलो इतिहास बनाएं               |

एक लक्ष्य है, एक लगन है,
कैसे श्रेष्ठ बनाएं भारत |
चंदा,सूरज सा देशों में ,
जगमग हम चमकाएं भारत |
हम इसको स्तुत्य बनाएं,
उठो चलो इतिहास बनाएं     

था इतिहास कभी ये अपना,
स्वर्णिम था ये देश हमारा |
उसी रूप में चमचम चमके,
रहे यही उद्देश्य  हमारा |
वहीं परिश्रम कर पहुंचाएं,
उठो चलो इतिहास बनाएं     

विज्ञानी बन नभ को छू लें,
पातालों तक मनभर  घूमें |
धरती पर हम स्वर्ग बनादें,
हर ऊंचाई को हम छू लें |
नये-नये प्रतिमान बनाएं,
उठो चलो इतिहास बनाएं     

नई-नई परतों को खोलें,
सिर्फ प्रेम की भाषा बोलें |
दीन-दुखी न रहे जगत में,
ऐसी सुंदर राहें खोलें |
एक सुखी संसार बनाएं,
उठो चलो इतिहास बनाएं       

खूब उगायें अन्न धरा पर,
शांति-अहिंसा रहे धरा पर |
घर-घर में उजियारा आये,
मने दिवाली रोज धरा पर |
भारत माँ को पूज्य बनाएं ,
उठो चलो इतिहास बनाएं       

 - धन वर्षा,हनुमान मन्दिर,
खटीमा-262308 (उ.ख)
 मो- 09410718777

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