बुधवार, 8 जून 2011

thik ye aadt kro

                 ठीक ये आदत करो 
                                  - राज सक्सेना 

खा रहे हो दीमकों सा, ठीक ये आदत करो |
देश का कैसे भला हो, मन से ये चाहत करो |
कर चुके नुकसान जितना,रोक दो बस करो |
रहनुमाए मुल्क अपनी,  बंद ये हरकत करो |
वोट से तोलो नहीं अब, तुम किसी की जान को,
जिस तरह भी हो सके  , अब बंद ये लानत करो |
दूसरों  पर   कब  तलक  डालोगे  अपनी तोहमतें   ,
झांक  कर खुद  का गिरेबां, बंद ये आफत करो |
देश हित में एक भी, गद्दार को पालो न तुम,
इस बुरी आदत को छोडो, मुल्क पर रहमत करो |
मॉल-ओ-जर कुछ भी नहीं, कौम भी कुछ चीज़ है,
अपने आमालों से इसकी, और मत शामत करो |
मुल्क की दौलत उड़ाते ही रहे तुम बेवजह,
मुल्क के किरदार पर भी खर्च ये नेमत करो |
सब बदल जायेगा अपने आप, बस इतना करो ,
`राज` उठ कर सिर्फ अपनी,  ठीक ये नीयत करो |



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