सोमवार, 6 जून 2011

sahara kam nahin hota

मिले तिनका भंवर में तो, सहारा कम नहीं होता |
अगर संघर्ष खुदसे  हो,   किनारा  कम  नहीं होता |
कोई बहता परेशां  जा रहा हो मौज - ए- दरिया में,
उसे  उस वक्त उँगली को, थमाना कम नहीं  होता|
खड़ा एक पेड़ सहरा में, बहिश्ती  लगने लगता  है,
किसी हैरां मुसाफिर को, ये साया  कम नहीं होता |
सदी तक बीत जाती है, किसी का जीतने में दिल ,
तआल्लुक-तर्क- करने को,जमाना कम नहीं होता |
बढाओ प्यास अपनी तो, समन्दर बूंद से कम है,
मिटाने तिशनगी सोचो तो, कतरा कम नहीं होता |
फिराक-ए-रौशनी  में `राज`,भटके जो अंधेरों में,
अगर एक राह हासिल हो, सितारा कम नहीं होता |
                                                 

                                          राज सक्सेना,
                             धनवर्षा ,हनुमान मन्दिर
              
                           खटीमा- २६२३०८ (उत्तराखंड)
                            मो- 09410718777

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