शुक्रवार, 3 जून 2011

pndrh agst

           पन्द्रह अगस्त  
                                               -राज सक्सेना 

भारत का जिस दिन उगा सूर्य,
और ब्रिटिशराज हो गया  अस्त |
भारत का   भाग्य-विधाता दिन,
है स्वर्णदिवस, पन्द्रह   अगस्त |

तोड़ी   जंजीर    गुलामी      की,
सर   आज़ादी  का   ताज  सजा |
इस दिन भारत में प्रथम  बार,
आज़ाद - फौज का बिगुल बजा |

आधी दुनिया का प्रखर    सूर्य,
पल  भर में  ही हो   गया अस्त |
|भारत का   भाग्य-विधाता दिन,
है स्वर्णदिवस, पन्द्रह   अगस्त 

लेकर   भागे    जो   पड़ा  हाथ,
जो  हमको  नित्य  सताते  थे |
बिन बात बिना   गलती के भी,
जो हमको नित्य   सताते   थे |

जब  चढ़ा  तिरंगा ,  फहराने ,
बंधन से  सब कुछ हुआ  मुक्त |
भारत का   भाग्य-विधाता दिन,
है स्वर्णदिवस, पन्द्रह   अगस्त |

गाँधी ने जग में  , नाम     किया,
बिन  लड़े ,  युद्ध में     जीत हुई |
हो   गयी  अहिंसा   सर्व- मान्य,
हर घड़ी    दुखों   की  बीत  गयी |

वह  शासन  , पार समुद्र   गया,
जिससे जनता थी बहुत   त्रस्त |
 भारत का   भाग्य-विधाता दिन,
है स्वर्णदिवस, पन्द्रह   अगस्त |

शासक, शासित सब   अपने   थे,
जिनको    सत्ता    में    आना  था |
जनता से प्रतिनिधि को चुनकर,
जनता का राज    चलाना      था |

जन गण बंधन    से  मुक्त  हुआ,
और ब्रिटिश  शौर्य हो गया अस्त |
भारत का   भाग्य-विधाता दिन,
है स्वर्णदिवस, पन्द्रह   अगस्त |

अब    बारी    अपनी   है   मित्रों,
भारत  को   स्वर्ग    बनाना  है |
हर खेत  मिले  जमकर   पानी,
हर  हाथ  काम   दिलवाना   है |

सबसे निर्धन, मजदूर,  कृषक,
इनको करना   है   कष्ट- मुक्त  |
भारत का   भाग्य-विधाता दिन,
है स्वर्णदिवस, पन्द्रह   अगस्त |

       -धनवर्षा , हनुमान मन्दिर,
      खटीमा-२६२३०८(उत्तराखंड)
      मो-  09410718777



                                                 

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