रविवार, 26 जून 2011

is devbhumi ki dhrti pr

                इस देव भूमि की धरती पर 
                                        - राज सक्सेना 
इस देवभूमि की धरती पर, पानी सा रक्त बहाया है |
इस महादान के बदले  ही, यह अलग राज्य बन पाया है |
तडपे घंटों तुम पड़े-पड़े, ज़ालिम शासन की छाया में ,
उत्तराखंड पर हो शहीद , तुमने इतिहास बनाया है |

हम आज तुम्हारे ही कारण, जीवन के सब सुख पाते हैं,
हो कर शहीद, नवजीवन दे, तुम गये, भूल कब पाते हैं,
यदि होते बीच हमारे तुम , तब दृश्य देख ये भी  लेते,    
 प्रति वर्ष सितम्बर पहली को, रस्में हर  वर्ष निभाते हैं |

बदले में यह कण मात्र नहीं, जो तुमने किया निराला था,
ये भगत सिंह, अशफाकुल्ला, के बलिदानों की माला  था ,
जो शून्य बना न रहने से, प्रतिपूर्ति नहीं हो सकती है,
इस महा समर में तुमने तो,सर्वस्व होम कर डाला    था |

जो सपना देखा था तुमने, वह पूर्ण कभी कर पायेंगे ,
क्या उन सपनों के भवनों को, हम मूर्त-रूप दे पाएंगे,
आओ आह्वान करें मिलकर, हम सपने पूरे करने का,
हर हाथ बढ़े निर्माण हेतु, सपनों का महल बनायेंगे |

केवल नारे और बातों से, सद कार्य नहीं हो पाते हैं,
जो दृढ निश्चय लेकर चलते, पर्वत पर राह बनाते हैं,
बाधा आये संकट आये, रुकना अब तो मंजूर  नहीं
कायर चलते नीचे झुक कर, सर सबके वीर झुकाते हैं |

बलिदान मांगते समर सभी, क्या हमने खून बहाए  हैं,
जो चले शहादत के पथ पर, क्या गीत उन्हीं के गाये हैं,
बलिदान हुए हैं हम पर जो, उनके प्रति  पल भर रुक कर,
क्या अश्रु  कणों के संग कभी, श्रद्धा के सुमन चढाये हैं |

                                        - धन वर्षा, हनुमान मन्दिर,
                                          खटीमा-262302
                                          मो- 09410718777

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