शुक्रवार, 10 जून 2011

inayat ho rhi hai

                इनायत हो रही है
                                    - राज सक्सेना

गरीबों पर इनायत हो रही है |
भिखारी  सी सखावत हो रही है |
लूट कर टेक्स हम गरीबों से,
पडौसी की, समाअत हो रही है |
गरीबों को सडक पर छोड़ मरने,
मुफ्तखोरों की हिफाजत हो रही है |
हमीं को कह रहे कातिल, चला गोली,
खुली बेहद, सखाफत हो रही है |
थमा कर हाथ में दोनों के खंजर,
खुली बन्दर वकालत हो रही है |
दिया है हाथ में गैरों के आंचल,
सगी माँ की, तिजारत हो रही है |
जरा सी हिल गयी कुर्सी तो चीखे,
विरोधी  की शरारत हो रही है | 
मलामत हो रही है`राज` फिर भी,
नही क्यूँ अब, बगावत हो रही है |  

-          dhnvrsha ,  hnuman mndir,
       khtima-262308
      moba-09410718777
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ninda,bgavt-vidroh 





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