रविवार, 26 जून 2011

hindi gjl

                               हिंदी गजल 
                                            - राज सक्सेना 
अब तो पारे सी चमकती, हो गयी हिंदी गजल |
मस्त हिरनी सी मचलती,हो गयी हिदी गजल |
दुख्तर-ए-दुष्यंत ने, अब पर निकाले देख लो,
आस्मां की एक परी सी , हो गयी हिंदी गजल |
लेके उर्दू से नफासत , माधुर्य अपना डाल कर,
क्या नशीली बन गयी है, अब नयी हिंदी गजल |
मीर ,ग़ालिब की चहेती, फैज़ के दिल की अज़ीज़,
सबकी चाहत पाके सबकी, हो गयी हिंदी गजल |
तन से हिंदी,मन से हिंदी,ले के  हिंदी    आत्मा,
गोद में हिंदी     के बैठी,  हो गयी    हिंदी गजल   |
शब्द अपने, भाव अपने, छंद भी    अपना तो है,
`राज` अब सबकी चहेती , हो गयी हिंदी गजल |

      - धन वर्षा,हनुमान मन्दिर, खटीमा-262308 

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