रविवार, 26 जून 2011

ayodhya faisla

                अयोध्या फैसला 
                                        -राज सक्सेना 
तीन जजों ने कर दिया, निर्णय नया प्रवीन |
पड़ी विवादित भूमि के, करदो हिस्से   तीन |
करदो हिस्से तीन,     बराबर    बाँटो   भाई ,
बना मूंछ का प्रश्न , लड़ो मत छद्म     लड़ाई |
कहे`राज कविराय`,फटे दिल फिरसे  जोड़ो,
`कुटिल धर्म निरपेक्ष,`व्यक्ति से नाता तोड़ो |

हुआ बाबरी का इधर, मुर्दा   तेरह       तीन |
कुटिल साम्प्रदायिक प्रखर,लगे बजाने बीन |
लगे बजाने बीन,  नाग को पुनः जगा   कर,
कर दें मटियामेट , खीर में नमक मिला कर |
कहे`राज कविराय`, राष्ट्र  की    करो भलाई ,
प्रेमभाव की जमी जड़ें, मत खोदो      भाई  |

हाशिम ने दिखला दिए, दिन में   तारे देख |
एक नये इतिहास के, लिखता है अब  लेख |
लिखता है अब लेख, लाभ लडवा  कर लेते ,
उन लोगों को हाशिम ने दिखलाये      ठेंगे |
कहे `राज` हाशिम सपूत ने, पंख    लगाये ,
शायद मसला साथ बैठ कर   हल हो  जाये |

तीनों न्यायाधीश थे,   पके-गुने  श्री  मंत |
हिन्दू-मुस्लिम एक हों,लिए साथमें  संत |
लिए साथ में संत, दूर की दुविधा     सारी,
किन्तु विषैले नाग,कर रहे  पुनः  तैयारी |
कहे `राज कविराय`,नहीं अब चलने वाली,
भस्मासुर की चाल, पड़ेगी उन पर   भारी |

दुष्ट व्यक्ति कहने लगे, निर्णय नहीं सटीक |
प्रथम आस्था-द्रष्टया,मुद्दे सुने   न     ठीक |
मुद्दे सुने न ठीक , इन्हें   कैसे   समझाओ ,
दादा इनके वही,इन्हें क्या सनद दिखाओ |
कहे`राज कविराय`,खेत की नहीं जमीं थी |
पूर्ण देश की भक्ति भावना,वहीं जुडी     थी | 

सुनो मुलायम सब रहो, नहीं तनो इस वख्त |
कुटिल चाल से इस समय,कब्र मिले न तख्त |
कब्र मिले न तख्त,  हाथ  से  दोनों      जाएँ ,
इश्वर और अल्लाह ,घ्रणा  करने   लग  जाएँ |
कहे`राज कविराय`, त्रिशंकू  मत  बन   जाना,
जाग रहा सद-भाव, पुनः  मत  आग   लगाना |

   - धन वर्षा, हनुमान मन्दिर, खटीमा-262308
          मो- 09410718777

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