शनिवार, 28 मई 2011

sartaj hai hindi

सरताज है हिंदी

भारत के इत्तिहाद का, अल्फाज़ है हिंदी /
सब की यही जुबान है, हमसाज़ है हिंदी /
सारे जहाँ में इससे कोई मीठी जुबां नहीं,
हर दिल में गूंजती हुई, आवाज़ है हिंदी /
कोना कोई बचा नहीं, चलती जहाँ न हो,
सपनों का तरक्की के, परवाज़ है हिंदी /
उठ के चली तो फिर कभी पीछे नहीं देखा,
दुनिया की हर जुबान की, सरताज है हिंदी /
गहनों से ज़ुबानों की, कामिल है देश फिर भी,
गहनों में ये सिरमौर है, मुमताज़ है हिंदी /
चंदा सी दिलनशीन है, तारों सी आबदार ,
सबसे अलग मुकाम का, अंदाज़ है हिंदी /
बहनों की तरह देश में, रहतीं हैं जुबानें,
सर पे सजा है सबके, वही ताज है हिंदी /
कहने को बहुत कुछ है, हिंदी की लताफत में,
हरदिल अज़ीज़, नेक जुबां, `राज`है हिंदी / 

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