मंगलवार, 31 मई 2011

maithili shran sht-sht pranam

मैथिली शरण  शत -शत  प्रणाम


कवि कोविद,कविवर,कविललाम ,
मैथिली शरण, शत-शत   प्रणाम  !

अंतर तक    छूकर,   सतत  मर्म,
हिंदी    को   माना,     राष्ट्र-  धर्म!
हिन्दीमय ,    भारत    कर  डाला,
कर अतुल परिश्रम, अथक कर्म !

लिख यशोधरा ,   साकेत -धाम !
मैथिली शरण, शत-शत  प्रणाम  !

साहित्य     क्षेत्र के    सूर्य सजग,
कर   डाला  हिंदी-जग    जगमग !
यूँ   तो  कवि  कितने  हर युग में,
पर  तुमने सबसे   लिखा  अलग,

लिख  अविचल, अविरल, अविराम 
मैथिली शरण, शत-शत    प्रणाम  !

पड़   गयी   तुम्हारी  , जब  छाया,
हिंदी   का   स्वर्णिम   युग  आया !
कर  क्षेत्र  नियत , अति श्रेष्ट लिखा,
तब श्रेष्ठ राष्ट्र-कवि,   पद     पाया !

हो   गया  सूर्य सा , प्रखर    नाम ,
मैथिली शरण, शत-शत   प्रणाम  !







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