सोमवार, 23 मई 2011

itihas likhunga main

              इतिहास लिखूंगा मैं 


कवि हूँ इतिहास लिखूंगा मैं,
कालजयी सी शिला प्रखर में /
खोजो तो निश्चित पा लोगे ,
मुझ को लड़ता कहीं समर में 

सृजक रहा हूँ विजयों का ही,
शब्दजाल में नहीं फंसा  मैं /
बिकती होंगी कविताएँ पर ,
कविता के संग नहीं बिका मैं /

मन से बांचो कविता मेरी,
मिल जाऊंगा उड़ता स्वर में /

खोजो तो निश्चित पा लोगे ,
मुझ को लड़ता कहीं समर में  /

विरुदावलियाँ गाकर कितने,
शाह सरीखे बने       भिखारी /
पर    दरबारी     चाटुकारिता,
मैंने कभी नहीं      स्वीकारी /

भ्रष्ट व्यवस्था के   विरुद्ध मैं,
डटा रहा हूँ , खड़ा डगर     में /  
खोजो तो निश्चित पा लोगे ,
मुझ को लड़ता कहीं समर में  /

लगा    रहे   हैं मोल    हमारा,
माँ के वसनों के       व्यापारी /
धरती का   सारा  धन  देकर ,
दे दें   अतुल सम्पदा      सारी /

किन्तु रहूँगा   अविचल रण में,
राष्ट्र-धर्म  रख  लिया शिखर में /
खोजो तो निश्चित पा लोगे ,
मुझ को लड़ता कहीं समर में  /

                 ( डा० राज सक्सेना )
धनवर्षा, हनुमान मन्दिर, खटीमा-262308 
( उत्तराखंड )
मो- ०९४१०७१८७७७, ०८०७३२०९९९ 

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