गुरुवार, 5 मई 2011

भ्रष्ट दरोगा स्तुति

हे कष्ट बढ़ायक खरे-खरे,
अपराध मिटायक मरे-मरे /
गुंडे और दुष्ट  लफंगों के,
सब उलटे सीधे काम करे /

खाकी खलनायक लट्ठ धरे,
अपराध सहायक पाल भरे /
जनता के भक्षक , हरे-हरे /

उलटे मुंह जन से बात करे,
बिनबात तमाचे चार धरे /
निर्दोष व्यक्ति को धमकाने,
डंडा दिखलाकर बात करे /

हे ख़ाल उतारक धरा-धरे,
नेता चरणों में सदा परे / 
जनता के भक्षक , हरे-हरे /

तुम से अपराधी सब हरषे,
निर्दोष बंद जल को तरसे /
बध-स्थल तक भी कांप उठे,
जब तेल लगा डंडा बरसे /

हे जुर्म-करायक दुष्ट अरे,
पैसे लेकर खुद कत्ल करे /
 जनता के भक्षक , हरे-हरे /

दुर्जन लोगों के पिता-मात,
आतंकी सर पर धरे  हाथ /
भागी बाला को पेशी से ,
पहले क्वाटर में रखे साथ /

हे नस्ल बिगाड़क सांड बुरे,
जो तुम करते कोई न करे /
जनता के भक्षक , हरे-हरे /

दीवान-सिपाही करें जाप,
थाना-आश्रम तुम गुरु-बाप /
दारू-हट्टी थाना लगता,
गरियाना करते शुरू आप /

खुद गली लायक काम करे,
दुष्टों में सबसे दुष्ट खरे /
जनता के भक्षक , हरे-हरे /

बेवर्दी लगते आप  खली ,
वर्दी पहनें तो महा बली /
चोरी-बटमारी में हिस्सा ,
दारू बिकवाते गली-गली /

गुंडा-उन्नायक सरा-सरे,
जन-गण को भय से त्रस्त करे /
जनता के भक्षक , हरे-हरे /

क्राइम करवाए धडा-धड़ी ,
फैला मजहब की शांत कढ़ी /
गाली-चांटे और डंडे से ,
इज्जत गिरवाता गली-गली /

लेकर फिरता पिस्तौल भरे,
एंन- काउन्टर में निर्दोष मरे /
जनता के भक्षक , हरे-हरे /

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