रविवार, 15 मई 2011

सरताज है हिंदी 

भारत के सर की शान है, सरताज है हिंदी,
दुनिया की हर जुबान से, मुमताज़ है हिंदी /
शाहिद है उड़ानों की, मेरे मुल्क की ये ही,
अर्श-ए-बरीं मकाम तक, परवाज है हिंदी /
सारे जहाँ में इससे कोई, मीठी जुबां नहीं,
भारत के पोर-पोर की आवाज़ है हिंदी /
पग-पग पे मिलींहमको  कितनी ही जुबानें,
है पाक उनमें सबसे, सुखन-ताज है हिंदी /
कोना कोई बचा नहीं, चलती जहाँ न हो,
हर दिल में बज रहा है, व्ही साज़ है हिंदी /
चंदा सी दिलनशीन है, तारों सी आबदार,
दुनिया में गूंजता हुआ, अल्फाज़ है हिंदी /
बहनों की तरह देश में, रहतीं हैं ये दोनों,
उर्दू है भक्ति-भाव, अजां- नमाज़ है हिंदी /
कहने को लताफत में कोई लफ्ज़ नहीं है,
हर दिल अज़ीज़, एक जुबां `राज`है हिंदी /

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