गुरुवार, 5 मई 2011

मेकप से ग्रांड मम्मा 

मेकप से ग्रांड मम्मा, दिखती जवान कमसिन ,
ढल तो चुका है सबकुछ, कसती कमान पलछिन /
पोतों की शादियों में, पहनें हैं जींस टाईट ,
होता है शार्ट  टाप-अप, हर साल और हर दिन /
करवा के सर्जरी वो, टाईट सी घूमती हैं,
खुद को लगीं समझने, नूतन जवान वरजिन /
जाती हैं रोज यूँ तो, जिम साथ फ्रेंड के वो,
ब्लाउज को रोज उनके, ढीला करे है दरजिन /
पोतों से कह दिया है, बोलें तो आंटी बस,
क्लब में जवान-कमसिन, लडके घुमाएं हरदिन /
पतिदेव अर्दली सा, रह मौन घूमता है,
भूले से कुछ भी बोला, उसको दिखाएँ दुर्दिन /
लटका दिया जो रब ने, टाईट कहाँ तलक हो ,
है `राज ` एक सीमा, रहलें यहाँ या बरलिन /

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें