सोमवार, 30 मई 2011

baith kar sinhasnon pr

       बैठ कर सिंहासनों पर, 
                                   -  राज सक्सेना

बैठ कर   सिंहासनों   पर, वो   खुदा सा हो गया !
मुझ में उसमें अब बड़ा एक ,फासला सा हो गया!
मौत का डर जब मेरे,मन मस्तिष्क से जाता रहा,
ज्वालामुखी से प्यार का, एक सिलसिला सा हो गया !
टूट कर   पतवार ने, जब से   दिया  धोखा    मुझे
अब भंवर  में   तैरने  का, होंसला   सा हो  गया !
देखिये  नाकामियों  की ,  कामयाबी  का   सिला,
दुश्मने जां भी बदल कर, अब भला सा  हो गया !
दीनदुनिया छोड़कर , जिसके लिए मैं मिट गया,
इन दिनों वो भी बदल कर, बेवफा   सा  हो गया !
क्या वजह है `राज`कुछ भी, अब समझ आता  नहीं  ,
इश्क  भी इस  दौर  का कुछ , बेमज़ा सा हो गया 
               धनवर्षा , हनुमान मन्दिर, खटीमा -262308  
               ( उत्तराखंड )  मोबा- 09410718777

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें