शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011


क्या मेल प्रिया

मैं दुबला -पतला मुन्ना सा, तुम मोटी धरा धकेल प्रिया ,
मैं स्कूटी तुम ऍन-फील्ड ,हम दोनों का क्या मेल प्रिया ,
मैं हूँ स्टेपनी नैनो की,तुम सुगढ़ सफारी का पहिया,
मैं चुहिया सा तुम लगो पाव, कैसे होगा ये खेल प्रिया /

मैं हिंद साईकिल टूटा सा, तुम नई बुलट हो परम प्रिया,
मैं हिन्दू सा निरपेक्ष जीव, तुम तालिबान का धरम प्रिया,
मैं पहलवान सिंगल पसली, तुम खली नन्दिनी लगती हो,
मैं हूँ मुकेश का नील रतन , तुम शेरावत बेरहम प्रिया /

तुम शाही पलंग सरीखी हो, मैं चर-मर करता तख्त प्रिया,
तुम भाग्य-वान  बंग्लेवाली , मैं झुग्गी का कमबख्त प्रिया ,
नीचे कालीनों के तुमने, अपने चरणों को धरा नहीं ,
तुम डनलप जैसी नर्म-नर्म ,मैं हूँ चटाई सा सख्त प्रिया /

तुम दिल्ली के मेट्रो जैसी, मैं पैसेंजर पटियाला का ,
तुम ख्म्बानी की डाटर सी, मैं नौकर लंगड़े लाला का,
धरती पर जब पग धरती हो, भूकम्प सरीखी हिलती है, 
तुम टुनटुन, मनोरमा जैसी, मैं मच्छर हूँ पशुशाला का /

तुम ब्रेड मोडर्न सूक्ष्म पकी, मैं जले हुए स्लाइस जैसा,
तुम दाल मक्खनी फुल थाली,मैं क्वाटरभर राईस जैसा,
मशरूम प्रिया तुम हाई-ब्रीड, मैं एक सड़ा सा आलू हूँ,
तुम प्राइस जैसी रोज बढ़ो, मैं रोज घटा साइज जैसा /

है लुकिग तुम्हारी जीएम सी, मैं लगता चपरकनाती हूँ,
स्पीड पोस्ट सी एक्टिव तुम, मैं पोस्ट कार्ड सी पाती हूँ ,
तुम हरियायाना सी हरी भरी, मैं राजपूताने का मरुथल,
तुम हो दिल्ली की हॉट मिक्स ,मैं पैचवर्क बरसाती हूँ /

मैं बरसाती खुट्टल चाकू ,तुम चमचम करती आरी हो,
मैं पड़ा उपेक्षित कोने में,तुम सबकी बहुत दुलारी हो ,
मुझ से केला तक कटे नहीं, तुम चोप करो सारी सब्जी,
तुम मल्टी-परपज छुरी लगो, फारेन की बनी दुधारी हो /

तुम ट्रक लगती हो टाटा का, मैं हूँ नैनो का मिनी रूप ,
मैं हूँ अशोक की लाट प्रिय, तुम शेरशाह का अंधकूप ,
तुम ताज महल सी लगो प्रिय, मकबरा लगूँ मैं उजड़ा सा,
अकबर जैसी तुम तनी-तनी , मैं हेमू पकड़ा हुआ भूप /

क्या जोड़ तुम्हारा मेरा है, हम नहीं एक हो सकते हैं ,
यदि साथ चलें तो हम दोनों, हथिनी चूहा से लगते हैं ,
तुम पूर्ण पूर्णिमा सी गोरी, मैं अमावसी अँधियारा सा,
हर एक गणित से जोड़-घटा,हम हास्यास्पद से लगते हैं /
हम हास्यास्पद से लगते हैं /

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