बुधवार, 20 अप्रैल 2011

आयुष्मती पूनम-आयुष्मान सर्वेश जी की रजत जयंती वर्ष-गांठ पर
 राज परिवार, खटीमा की ओर से सप्रेम 

आज ही तो मिले थे हृदय दो अलग ,
एक होकर बने एक संसार से  /
हो समर्पित गये , दूरियां न रहीं ,
एक मधुर धुन बजी मन के  स्वर तार से / 


बन गये ईश सर्वेश परिवार के ,
एक नया युग शुरू हो गया प्यार से /
दोनों मिल कर रहे सैकड़ों दुःख सहे,
स्नेह फूलों से था , नेह था खार से /

कितने तूफ़ान आये रहे पर अचल ,
एक से दो हुए हो गये चार से /
बेटियों को समझ मन से बेटा सदा ,
हर तरह पालते हैं इन्हें प्यार से /

बीत कैसे गया , एक युग ढल गया ,
वर्ष पच्चीस बीते , सतत प्यार से /
प्रेम छाया बना , एक छत की तरह , 
जो बचाता रहा , वक्त की मार से /

सात  सुर की तरह गीत -संगीत से ,
प्यार की मूर्ति पर चढ़े हार से /
ज्वार भाटा  जो आया ख़ुशी से सहा ,
 बच के चलते रहे वक्त की धार से /


दूज के चाँद सी खिलखिलाती थी जो ,
गोद में ही पली थी जो नित प्यार से /
आज पूनम वही , चन्द्रमा पूर्ण हो ,
सबके मन में बसी , पूर्ण अधिकार से /

आज पच्चिस बरस की बहारों के दिन ,
आये सर्वेश -पूनम के सत्कार से /
सौ बरस तक जियें, 'राज' जगमग करें ,
ये सुमी ओर विदु के सतत प्यार से /


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