बुधवार, 13 अप्रैल 2011

माहौल गन्दा या खुदा

 इस सियासत ने किया, माहौल गंदा या खुदा ,/
फिर किया इन्साफ की देवी को अंधा या खुदा /

हानि-लाभों की तराजू में हमेशा तौल कर,
कर रहे संसद में जाकर , लोग  धंधा या खुदा /


 क्या गजब हित साधने ,क़ानून बनते हैं यहाँ ,
है यहाँ कानून  अब , बन्दा -ओ -बन्दा या खुदा 

कल तलक कानून का ,देता हवाला जो फिरा ,
 कत्ल वो कानून का ,करता दरिंदा या खुदा /

एक सा कानून भारत में नहीं लागू हुआ , 
तीन सौ सत्तर का सर पर , है पुलंदा या खुदा /

जिन्दगी भर जो लड़ा,जिन्दा हूँ मैं मुर्दा नहीं ,
घोषणा मरने पे होती ,है वो जिन्दा या खुदा /

घर में खाने को नहीं , लोगों के दाना अन्न का ,
लोग जबरन मांगते हैं , उससे चंदा या खुदा /

देश को किस घाट पर , जाकर डुबाएं 'राज 'ये ,
हर जगह बहती यहाँ , रिश्वत की गंगा या खुदा /

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